श्रीमद् भगवद् गीता – सत्र 1
“युगदृष्टा हितेश चंदेल” के साथ भगवद् गीता के शाश्वत ज्ञान की खोज
एक प्रेरणादायक ऑनलाइन सत्र | ज़ूम पर सजीव प्रसारण | निःशुल्क पंजीकरण | स्वैच्छिक दान
क्या आपने कभी सोचा है कि जीवन की जटिल परिस्थितियों, चुनौतियों और प्रश्नों के समाधान का मार्ग हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा में पहले से ही विद्यमान है?
श्रीमद् भगवद् गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को समझने, स्वयं को जानने, अपने उद्देश्य को पहचानने, सही निर्णय लेने और सार्थक जीवन जीने का एक शाश्वत मार्गदर्शन है।
आइए, युग दृष्टा हितेश चंदेल के साथ इस विशेष सत्र में जुड़ें और श्रीमद् भगवद् गीता के उस दिव्य ज्ञान को समझें, जिसकी प्रासंगिकता हजारों वर्षों के बाद भी आज के जीवन में उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस सत्र का उद्देश्य भगवद् गीता को केवल एक धार्मिक अथवा आध्यात्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विकास, आत्मबोध, नेतृत्व, जीवन प्रबंधन और आत्मिक संतुष्टि के व्यावहारिक मार्गदर्शक के रूप में समझना है।
इस सत्र में आप क्या जानेंगे?
1. श्रीमद् भगवद् गीता का परिचय
- भगवद् गीता की उत्पत्ति, पृष्ठभूमि और मूल संदेश।
- महाभारत के संदर्भ में गीता का महत्व।
- गीता के शाश्वत ज्ञान का सार।
2. वर्तमान जीवन में भगवद् गीता की प्रासंगिकता
- आधुनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने में गीता की भूमिका।
- व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में गीता की उपयोगिता।
- संबंधों, निर्णयों और नेतृत्व में गीता का मार्गदर्शन।
3. आत्मचिंतन के सूत्र
- स्वयं को जानने और समझने की यात्रा।
- विचारों, भावनाओं और कर्मों के प्रति जागरूकता।
- आत्मबोध और आत्मविकास के महत्वपूर्ण सूत्र।
4. व्यवहारिक मार्गदर्शन
- गीता के ज्ञान को दैनिक जीवन में उतारना।
- कर्तव्य, कर्म और उत्तरदायित्व की समझ।
- जीवन में संतुलन, स्पष्टता और आंतरिक शांति विकसित करना।
वक्ता परिचय : युग दृष्टा हितेश चंदेल
हितेश चंदेल नेतृत्व विकास, आत्मबोध, आत्मसाक्षात्कार और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में सक्रिय एक नेतृत्व मार्गदर्शक एवं परिवर्तन के प्रेरक हैं। वे Defined Values Consultants Pvt. Ltd. के संस्थापक तथा PYP Golden Age Foundation के संस्थापक एवं मुख्य मार्गदर्शक हैं।
उनका उद्देश्य शाश्वत भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक जीवन, नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन के साथ जोड़कर व्यक्तियों को उनकी उच्चतम संभावनाओं के साक्षात्कार के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम का विवरण
- दिन: रविवार, 1 नवम्बर 2026
- समय: सायं 4:00 बजे से 5:30 बजे तक
- समय क्षेत्र: भारतीय मानक समय (IST)
- माध्यम: ऑनलाइन – ज़ूम (Zoom)
- प्रवेश शुल्क: निःशुल्क, सत्र के बाद अपनी इच्छा से गुरु दक्षिणा दे सकते हैं
- पंजीकरण: पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है।
- ज़ूम लिंक: पंजीकृत प्रतिभागियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
यह सत्र किनके लिए है?
- जो भगवद् गीता को गहराई से समझना चाहते हैं।
- जो जीवन में अपने उद्देश्य और दिशा की खोज कर रहे हैं।
- जो आत्मबोध एवं आत्मविकास की यात्रा प्रारंभ करना चाहते हैं।
- उद्यमी, पेशेवर, प्रबंधक एवं नेतृत्वकर्ता।
- आध्यात्मिक जिज्ञासु एवं ज्ञान के साधक।
- वे सभी व्यक्ति जो अपने जीवन को अधिक सार्थक, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहते हैं।
आइए, साधक बनें। ज्ञान को समझें। जीवन को रूपांतरित करें।
भगवद् गीता केवल पढ़ने का ग्रंथ नहीं है, बल्कि समझने, आत्मसात करने और जीवन में उतारने का दिव्य ज्ञान है।
इस ज्ञान यात्रा का हिस्सा बनें और जानें कि हजारों वर्ष पुराना यह शाश्वत ज्ञान आज भी हमारे जीवन को नई दिशा कैसे दे सकता है।
आज ही पंजीकरण करें!
एक जिज्ञासु मन, एक खुला हृदय और स्वयं को जानने की इच्छा लेकर इस ज्ञान यात्रा से जुड़ें।
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