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AAP के 7 सांसदों का बीजेपी में शामिल होना दल बदल कानून (Anti-Defection Law) का उल्लंघन इसलिए नहीं माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने "दो-तिहाई बहुमत" के नियम का पालन किया है। दल बदल विरोधी कानून (संविधान की 10वीं अनुसूची) के तहत छूट मिलने के मुख्य कारण निम्न हैं:-
दो-तिहाई बहुमत का नियम-
91वें संविधान संशोधन (2003) के अनुसार, यदि किसी विधायी दल (Legislative Party) के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय (Merge) करने का निर्णय लेते हैं, तो उन पर दल बदल कानून लागू नहीं होता और उनकी सदस्यता बरकरार रहती है।
राज्यसभा में संख्या बल:
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद थे। कानून के अनुसार, अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम 7 सांसदों (10 का 2/3 हिस्सा) का एक साथ जाना जरूरी था।
वैध विलय:
चूंकि राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले इस समूह में कुल 7 सांसद (स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत साहनी) शामिल हैं, इसलिए इसे पार्टी का "विलय" माना जाएगा, न कि व्यक्तिगत दल बदल।
परिणाम:
इस 2/3 संख्या बल के कारण इन सांसदों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
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Dakshinpuri, Delhi, India, New Delhi
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