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2018 Kojagara Vratam, Kojagari PujaIn West Bengal, Orissa and Assam, the most important day to worship Goddess Lakshmi falls on the full moon day in lunar month Ashwin. Lakshmi Puja on Purnima Tithi in month of Ashwin is known as Kojagara Puja and more commonly known as Bengal Lakshmi Puja. Kojagara Puja Purnima is more famously known as Sharad Purnima in most parts of India.यहाँ 🌕 कोजागरी पूजा (Kojagara Puja) और 🌕 शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) के बारे में सही तारीख, समय और धार्मिक महत्व आसान हिन्दी में👇
📅 शरद पूर्णिमा / कोजागरी पूजा 2026 कब है?
📌 तारीख: 25 अक्टूबर 2026, रविवार
👉 शरद पूर्णिमा यानी कोजागरी पूजा / कोजागरी पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि पर आती है। �
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🗓️ पूर्णिमा तिथि समय:
25 अक्टूबर 2026 दोपहर ~11:55 बजे से शुरू
26 अक्टूबर 2026 सुबह ~09:40 बजे तक रहती है। �
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📌 इस दिन की रात पूर्णिमाओं में सबसे रोशन और शुभ मानी जाती है, इसलिए पूजा और जागरण की परंपरा होती है। �
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🌟 शरद पूर्णिमा / कोजागरी पूजा का महत्व
✨ शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima)
यह हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को आती है।
चंद्रमा इस रात अपनी सबसे पूर्ण और उज्जवल चमक पर होता है और माना जाता है कि वह सोलह कलाएँ (16 divine qualities) लेकर चमकता है, जिससे आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए विशेष फल प्राप्त होते हैं। �
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✨ कोजागरी पूजा (Kojagara Puja / Kojagiri Purnima)
पूर्वी भारत (जैसे पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम) में यह दिन माँ लक्ष्मी की पूजा और जागरण (रात जागना) के रूप में मनाया जाता है।
नाम “कोजागरी” का अर्थ है “को जागति?” / “कौन जाग रहा है?” — अर्थात़ देवी लक्ष्मी पूछती हैं कि कौन जाग कर उनका ध्यान कर रहा है, इसलिए जो भक्त रात्रि जागरण करते हैं उन्हें धन-संपत्ति और आशीर्वाद मिलता है। �
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📜 कुछ जगहों पर इसे कोजागिरि पूर्णिमा या बंगला लक्ष्मी पूजा भी कहा जाता है। �
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🪔 पूजा-विधि और परंपराएँ
🌙 1) रात का जागरण (Jagran)
✔️ भक्त रात भर जागकर माँ लक्ष्मी की पूजा, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करते हैं।
✔️ देवी के आगमन के लिए दीपक/मोमबत्तियाँ जलाते हैं और घर को रोशन रखते हैं। �
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🍚 2) चाँदनी में खीर (Moonlight Kheer)
✔️ कई जगहों पर खीर (दूध-चावल की मीठी डिश) तैयार कर खुले आसमान में चंद्रमा की रोशनी में रात भर रखी जाती है।
✔️ मान्यता है कि चंद्रमा की किरने खीर को पोषक, स्वास्थ्य-वर्धक और पुण्य-फलदायी बनाती हैं, और अगले दिन इस खीर को प्रसाद के रूप में खाया जाता है। �
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🪙 3) लक्ष्मी-पार्वती-चंद्र पूजा
✔️ माँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा की जाती है — दीपक, फूल, अक्षत एवं नैवेद्य चढ़ाया जाता है।
✔️ चंद्र देव का भी दर्शन/पूजन किया जाता है क्योंकि यह पूर्णिमा विशेष चंद्र देव की पूर्णता का पर्व है। �
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📿 4) व्रत और दान
✔️ कुछ भक्तों व्रत रखते हैं और रात भर सत्संग, प्रार्थना और दान-पुण्य करते हैं।
✔️ दान (खाद्य सामग्री, वस्त्र आदि) देने से पुण्य की वृद्धि मानी जाती है। �
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🌼 धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
✨ शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूजा का मूल लक्ष्य चंद्रमा के प्रकाश, प्राकृतिक ऊर्जा और देवी लक्ष्मी की कृपा से जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति और खुशहाली प्राप्त करना है। �
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✨ चाँद पूर्णता की रात में चंद्र-किरणों के प्रति श्रद्धा व आशीर्वाद की भावना से पूजा करना शुभ माना जाता है। �
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✨ यह पर्व सोशल-परिवारिक मिलन, सामूहिक जागरण, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक ध्यान का भी अवसर देता है। �
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📌 मुख्य बातें संक्षेप में
विषय
जानकारी
त्योहार का नाम
शरद पूर्णिमा / कोजागरी पूजा
साल
2026
तारीख
25 अक्टूबर 2026, रविवार �
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पूर्णिमा तिथि
25 Oct दोपहर ~11:55 से 26 Oct सुबह ~09:40 तक �
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मुख्य पूजा
माँ लक्ष्मी व चंद्र देव की पूजा, रात जागरण �
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विशेष परंपरा
खीर को चाँदनी में रखना, रात जागरण, दान-पुण्य �
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लाभ/फल
समृद्धि, स्वास्थ्य, सत्कार्य, आशीर्वाद �
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🪷 एक अतिरिक्त बात
कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में इसे रास पूर्णिमा (भगवान कृष्ण की रास लीला की स्मृति में) के रूप में भी मनाया जाता है। �
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अगर चाहें तो मैं पूजा-समग्री सूची और स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि भी दे सकता हूँ — बस बताइए! 😊
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Event venue
Budho Balaji Darwar Gol Mandir,budho Shiv Talla Mandir, BUDHO BALAJI DARWAR(budho Shiv Talla Gol Mandir),Kolkata, India
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