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बिहार के समस्तीपुर जिले में पटोरी अनुमंडल के अंतर्गत स्थित धमौन (Dhamoun) गांव होली के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां की छाता होली (Chhata Holi) एक अनोखी, सैकड़ों साल पुरानी परंपरा है, जो वृंदावन-बरसाना की लठ्ठमार होली की याद दिलाती है, लेकिन इसमें अपना अलग ही रंग-ढंग और ग्रामीण माटी की सुगंध है। छाता होली की खासियत है कि गांव के हर टोले में लोग बांस की कमची और रंग-बिरंगे कागज/कपड़े से बड़े-बड़े कलात्मक और विशाल छाते (छतरियां) तैयार करते हैं। कभी-कभी पूरे गांव में 30-40 से ज्यादा ऐसे छाते बनते हैं।
होली के दिन ये छाते गांव में घूमते हैं। लोग इन छातों के नीचे इकट्ठा होकर फाग गाते हैं, हरमोनियम, ढोलक, झाल की धुन पर होली के लोकगीत गाते हुए रंग-गुलाल उड़ाते हैं।
इसमें लठ्ठमार की बजाय ज्यादा गले मिलकर, हंसते-खेलते, एक-दूसरे पर गुलाल लगाकर होली खेली जाती है। पूरा माहौल भक्ति, उल्लास और सामूहिकता से भर जाता है।
यह परंपरा लगभग 500 साल पुरानी मानी जाती है (कुछ स्रोतों में 1935 से लगातार लिखित रूप में चर्चा है, लेकिन मौखिक रूप से और भी पुरानी बताई जाती है)।
कहां होती है मुख्य आयोजन?
मुख्य रूप से बाबा निरंजन स्थान (Niranjan Swami Temple) या गहबर क्षेत्र में।
होली की शुरुआत चैता गायन से होती है और शाम तक छाते घूमते रहते हैं।
दूर-दूर से लाखों लोग इसे देखने आते हैं, खासकर बिहार के अलावा यूपी, झारखंड और अन्य राज्यों से भी।
क्यों है इतनी खास?
धमौन की छाता होली सिर्फ रंग खेलने का त्योहार नहीं, बल्कि ग्रामीण बिहार की संस्कृति, लोक संगीत, हस्तशिल्प (छाता बनाना) और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है। लोग इसे "बिहार का बरसाना" भी कहते हैं। कई लोग मांग करते हैं कि इसे राजकीय महोत्सव का दर्जा मिले, ताकि और ज्यादा संरक्षण और प्रचार हो।
अगर आप पटना या बिहार में हैं, तो अगली होली पर धमौन जरूर जाएं – वहां का माहौल देखकर मन झूम उठेगा!
धमौन गांव की छाता होली इसबार
दिनांक = 04/03/2026/को मानाया जाएगा !
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Event Venue
Adalatganj, Patna, India
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