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“सोच बदलेगी तो शिक्षा अपने आप विकसित होगी”
वर्ष 2013 के अंत तक राज्य में लगभग 82,000 से अधिक विद्यालय संचालित थे। इनमें—
कक्षा 1 से 5 तक के लगभग 46,000 विद्यालय,
कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 32,000 विद्यालय,
तथा कक्षा 6/9 से 12 तक के 4,418 उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल थे।
एक ही स्थान पर दो से तीन विद्यालय संचालित होने के कारण शिक्षकों का समुचित वितरण नहीं हो पा रहा था तथा भौतिक संसाधनों का व्यापक दुरुपयोग हो रहा था। इन परिस्थितियों के कारण राज्य शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े (बीमारू) राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था।
इतनी बड़ी संख्या में विद्यालय होने के बावजूद प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को मिलाकर कुल नामांकन मात्र 56 लाख था। विशेष रूप से बालिकाओं के लिए कक्षा 12 तक शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत कठिन था।
इस स्थिति को बदलने के लिए तत्कालीन सरकार ने दृढ़ संकल्प के साथ कठोर लेकिन जनहितकारी निर्णय लिए। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक ही स्थान पर संचालित विद्यालयों का समेकन (रैशनलाइजेशन) किया गया तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर कक्षा 12 तक के विद्यालय स्थापित किए गए। परिणामस्वरूप राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया और “बीमारू राज्य” का टैग समाप्त हो गया। अन्य राज्य भी इस मॉडल से सीख लेने लगे।
विद्यालयों के पुनर्गठन के बाद संख्या भले ही कम दिखाई दे, लेकिन शिक्षा की वास्तविक इकाइयों में कमी नहीं आई, बल्कि वृद्धि हुई। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है—
कक्षा 1 से 5 के लिए लगभग 65,000 शैक्षिक इकाइयाँ,
कक्षा 1 से 8 के लिए लगभग 36,000 इकाइयाँ,
तथा कक्षा 1 से 12 के लिए 19,500 से अधिक इकाइयाँ उपलब्ध हैं।
इस व्यवस्था से शिक्षकों का युक्तिसंगत पदस्थापन संभव हुआ और सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह हुआ कि बालिकाओं को अपने निकट ही कक्षा 12 तक की शिक्षा सुलभ हो गई।
इसी का परिणाम रहा कि वर्ष 2018 तक राजकीय विद्यालयों में नामांकन बढ़कर 80 लाख तक पहुँच गया।
हालाँकि, उस समय भी कुछ लोगों द्वारा—जो शिक्षा की वास्तविक आवश्यकता को नहीं समझते या बालिका शिक्षा के प्रति उदासीन हैं—इस व्यवस्था का विरोध किया गया। यहाँ तक कि चुनावी घोषणा पत्रों में विद्यालयों के पुनः विभाजन (डिमर्ज) के वादे किए गए, लेकिन 2019 से 2023 तक ऐसे कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा सके। पाँच वर्षों में 500 नए प्राथमिक विद्यालय भी स्थापित नहीं हो पाए।
अब यदि मै राज्य की भौगोलिक स्थिति के आधार पर विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकता का विश्लेषण करूं —
कुल क्षेत्रफल: 3,42,239 वर्ग किमी
लगभग 40% क्षेत्र (रेगिस्तान, पहाड़, नदी आदि) आवास योग्य नहीं
वास्तविक आवासीय क्षेत्र: लगभग 2 लाख वर्ग किमी
RTE मानकों के अनुसार—
1 किमी परिधि में प्राथमिक विद्यालय
2 किमी परिधि में उच्च प्राथमिक विद्यालय
5 किमी परिधि में उच्च माध्यमिक विद्यालय
तो आवश्यकता होगी—
प्राथमिक विद्यालय: लगभग 63,000
उच्च प्राथमिक विद्यालय: लगभग 17,000
उच्च माध्यमिक विद्यालय: लगभग 20,000
वर्तमान में राज्य में इन आवश्यकताओं से अधिक विद्यालय उपलब्ध हैं।
फिर भी, ऐसे अनेक विद्यालय जहाँ नामांकन 10 से भी कम है, वे संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था की छवि को प्रभावित कर रहे हैं। अतः आवश्यकता है कि हम सभी—जनता, मीडिया और नीति-निर्माता—सकारात्मक सोच अपनाएँ और कम नामांकन वाले विद्यालयों के समुचित पुनर्गठन का समर्थन करें, ताकि गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके।
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Sindhi Camp, Sindhi Camp,Jaipur, Rajasthan, India
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