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एंटी-टरमाइट ट्रीटमेंट पाइपिंग सिस्टम की प्रक्रियायह प्रक्रिया मुख्य रूप से घर के निर्माण के दौरान की जाती है ताकि एक स्थायी दीमक अवरोध बनाया जा सके। इसे 'दीमक रेटिकुलेशन सिस्टम' भी कहते हैं।
1. योजना और डिज़ाइन (Planning and Design):
* सबसे पहले, इमारत के लेआउट के आधार पर पाइपिंग सिस्टम का डिज़ाइन तैयार किया जाता है। इसमें यह तय किया जाता है कि पाइप कहाँ-कहाँ बिछाए जाएंगे ताकि पूरे क्षेत्र को कवर किया जा सके।
* मुख्य रूप से, पाइपों को नींव, दीवारों के आसपास, और फर्श के नीचे एक ग्रिड पैटर्न में बिछाने की योजना बनाई जाती है।
2. पाइप बिछाना (Laying of Pipes):
* यह काम आमतौर पर नींव डालने के बाद और फर्श की कंक्रीट (PCC - Plain Cement Concrete) डालने से पहले किया जाता है।
* पाइप का प्रकार: विशेष प्रकार के छिद्रित (perforated) या पोरस (porous) पाइप का उपयोग किया जाता है। इन पाइपों में छोटे-छोटे छेद होते हैं जिनके ज़रिए दीमक-रोधी रसायन मिट्टी में समान रूप से फैलता है। ये पाइप लचीले और टिकाऊ होते हैं।
* व्यवस्था: पाइपों को पूरे क्षेत्र में व्यवस्थित रूप से बिछाया जाता है। आंतरिक दीवारों के समानांतर, और फर्श के बीच में एक ग्रिड डिज़ाइन में पाइप लगाए जाते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि रसायन हर जगह पहुँच सके।
* सुरक्षात्मक परत: पाइपों को सीधे सीमेंट या कंक्रीट के संपर्क में आने से बचाने के लिए, उनके ऊपर और आसपास रेत की एक परत बिछाई जाती है। यह न केवल पाइपों को क्षति से बचाता है बल्कि रसायन को मिट्टी में बेहतर तरीके से रिसने में भी मदद करता है।
3. जंक्शन बॉक्स/चार्जिंग पोर्ट स्थापित करना (Installing Junction Boxes/Charging Ports):
* पाइपों के नेटवर्क को जंक्शन बॉक्स (जिसे चार्जिंग पोर्ट भी कहते हैं) से जोड़ा जाता है।
* ये बॉक्स आमतौर पर घर की बाहरी दीवारों पर, या ऐसे स्थानों पर लगाए जाते हैं जहाँ आसानी से पहुँचा जा सके लेकिन वे दिखाई न दें।
* ये बॉक्स रसायन को पाइपों में डालने के लिए एक्सेस पॉइंट का काम करते हैं।
4. फर्श और निर्माण कार्य पूरा करना (Completing Floor and Construction Work):
* एक बार पाइपिंग सिस्टम सही ढंग से बिछ जाने और रेत की परत चढ़ जाने के बाद, फर्श की कंक्रीट डाली जाती है और उसके ऊपर टाइल्स या अन्य फर्श सामग्री लगाई जाती है।
* इसके बाद भवन का शेष निर्माण कार्य सामान्य तरीके से पूरा किया जाता है।
5. दीमक-रोधी रसायन इंजेक्ट करना (Injecting Termiticide Chemical):
* जब निर्माण कार्य लगभग पूरा हो जाता है, तो जंक्शन बॉक्स के माध्यम से पाइपिंग सिस्टम में दीमक-रोधी रसायन (जैसे क्लोरपायरीफोस या इमिडाक्लोप्रिड) को कम दबाव पर इंजेक्ट किया जाता है।
* पाइपों के छिद्रों से यह रसायन मिट्टी में समान रूप से रिस जाता है, जिससे इमारत के चारों ओर एक रासायनिक अवरोध (chemical barrier) बन जाता है। यह अवरोध दीमक को इमारत में प्रवेश करने से रोकता है।
6. पुनःपूर्ति और रखरखाव (Replenishment and Maintenance):
* इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दीमक-रोधी रसायन की प्रभावशीलता आमतौर पर 3-5 साल तक रहती है। उसके बाद, बिना किसी तोड़-फोड़ के, जंक्शन बॉक्स के माध्यम से आसानी से रसायन को फिर से भरा जा सकता है।
* नियमित निरीक्षण और आवश्यकतानुसार पुनःपूर्ति यह सुनिश्चित करती है कि आपका घर दीमक से लंबे समय तक सुरक्षित रहे।
यह प्रक्रिया दीमक से बचाव का एक दीर्घकालिक, प्रभावी और स्वच्छ तरीका है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सुविधा प्रदान करता है।
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